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श्री विजेथुआ महावीरन धाम के रहस्य

लक्ष्मण प्राण रक्षा हेतु,
लेने संजीवनी हिमालय,
इसी रास्ते, जा रहे थे,
श्री हनुमान।

कार्य में विघ्न डालने,
साधू भेष धारण कर,
बैठ गया कालनेमि,
राक्षस इस स्थान।

राम नाम रट रहा था,
छल वह रच रहा था,
सुनकर प्रभू राम का नाम,
आ पधारे यहाँ,
श्री हनुमान।

कालनेमि ने अगला छल रचा,
"थोड़ा विश्राम कीजिए "उनसे कहा,
पास तालाब में भेजा उन्हे ,
करने को स्नान।

स्नान को उतरे हनुमान मकरीकुंड,
मगरी ने जल में कर दिया आक्रमण,
हनुमान हाथों मगरी का वध हुआ,
उद्धार पा मगरी,बन गई सुंदर अप्सरा।

अप्सरा ने बताई फिर मायावी साधू
की पहचान
कार्य को बाधित करने छल रच रहा है,
बैठा यह राक्षस यहाँ ।

बजरंगबली का क्रोध फूटा
कालनेमि को उठा पटका
क्षण भर में ही कर दिया
राक्षसी बाधा का सर्वनाश।

पवित्र इस धाम को,
प्राप्त है यह आशीर्वाद ,
विघ्न बाधा दुख ,
सब होंगे समाप्त ,
सच्चे मन से आएगा जो,
विजेथुआ महावीरन धाम।
जय श्रीराम जय श्रीराम ।।

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दक्षिणमुखी स्वयंभू हनुमान जी

श्री विजेथुआ धाम की विशेष बात यह है कि यहां स्थित हनुमान जी की मूर्ति दक्षिणमुखी और स्वयंभू (स्वतः प्रकट) है। मान्यता है कि इस स्थल पर हनुमान जी का दाहिना पैर पाताल लोक तक चला गया था। पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई में भी उनके पैर का अंत नहीं मिल सका, जिसके बाद यहीं पर मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर में स्थित हनुमान जी की यह पत्थर की प्रतिमा केवल जनपद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। जौनपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, प्रतापगढ़ सहित अन्य जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यहां मेले जैसा दृश्य देखने को मिलता है।

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मकड़ी कुंड का महत्व

मकड़ी कुंड श्री विजेथुआ धाम का एक पवित्र जलकुंड है, जो आस्था और पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे, तब उन्हें प्यास लगी और वे इस कुंड में पानी पीने के लिए रुके। उसी समय, रावण द्वारा भेजा गया राक्षस कालनेमि साधु का वेश धारण कर उन्हें धोखा देने की कोशिश कर रहा था। एक मकड़ी ने हनुमान जी को कालनेमि के छल के बारे में बताया, जिसके बाद हनुमान जी ने वहीं उसका वध कर दिया। आज भी यह कुंड श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस कुंड में हाथ-पैर धोकर या स्नान करने के बाद ही हनुमान जी के दर्शन और पूजन करना शुभ होता है। इस धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण मकड़ी कुंड भक्तों के लिए एक प्रमुख आस्था स्थल बना हुआ है।

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भव्य हनुमान आरती

श्री विजेथुआ धाम में हनुमान जी की भव्य आरती श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य और अद्भुत अनुभव होता है। हर मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से होने वाली इस आरती में हजारों भक्त शामिल होते हैं। घंटों और शंखनाद की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है। हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष दीपों की जगमगाहट, मंत्रोच्चारण और भक्ति संगीत की मधुर ध्वनि भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। इस दौरान भक्त जय श्री राम और बजरंग बली की जय के जयकारों से माहौल को और भी भक्तिमय बना देते हैं। इस दिव्य आरती में शामिल होने से भक्तों को अद्भुत शांति और शक्ति का अनुभव होता है।

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हनुमान जी के प्रिय भक्त – बंदरों को भोजन कराना

श्री हनुमान जी को बंदरों का संरक्षक और प्रिय देवता माना जाता है, इसलिए भक्तगण बंदरों को भोजन कराना पुण्य का कार्य मानते हैं। श्री बिजेथुआ धाम में आने वाले श्रद्धालु चने, केले, गुड़, और अन्य प्रसाद बंदरों को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि बंदरों को भोजन कराने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भक्त प्रेम और श्रद्धा से बंदरों को खिलाते हैं, जिससे मंदिर परिसर में एक भक्ति और करुणा से भरा दृश्य देखने को मिलता है।

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